थाईलैंड से माँ तुतला भवानी पहुंचे पर्यटक,सुंदरता पर हुए मंत्रमुग्ध
तिलौथू प्रखंड अंतर्गत रोहतास जिले का गौरवशाली मां तुतला भवानी ईको-पर्यटन स्थल अब अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहा है। यहां की प्राकृतिक भव्यता, हरियाली, झरने और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम अब देश ही नहीं, बल्कि विदेशों के लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इसी क्रम में शनिवार को थाईलैंड से आए पर्यटकों का एक विशेष दल मां तुतला भवानी धाम पहुंचा। इस दल ने स्थल की अद्वितीय सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण को देख ऐसा अनुभव किया, जिसे उन्होंने “धरती का स्वर्ग” बताया।
विदेशी मेहमानों का पहला अनुभव
थाईलैंड से पहुंचे इन पर्यटकों का स्वागत स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से किया। जैसे ही वे मां तुतला भवानी धाम परिसर में पहुंचे, हरियाली से घिरे पहाड़ों, कल-कल बहते झरनों और गुफाओं की भव्यता ने उनका मन मोह लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई देशों में नेचर टूरिज्म का आनंद लिया है, लेकिन मां तुतला भवानी स्थल जैसी शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा कहीं महसूस नहीं हुई।
पर्यटकों ने मां तुतला भवानी के दरबार में माथा टेककर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया। इस दौरान वे यहां की धार्मिक परंपराओं और आस्था से गहराई से जुड़े। उन्होंने परिसर में लगे हर पौधे, झरनों और चट्टानों का निरीक्षण किया और बार-बार इसकी सराहना की।
संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य से प्रभावित
पर्यटकों ने केवल प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य का भी अनुभव लिया। ग्रामीणों द्वारा किए गए स्नेहपूर्ण स्वागत ने उन्हें भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में “अतिथि देवो भव” की परंपरा का वास्तविक अनुभव उन्हें यहां मिला।
स्थानीय जनप्रतिनिधि दीपक चौधरी से प्रभावित होकर उन्होंने उन्हें अपने देश की करेंसी भेंट कर सम्मान भी व्यक्त किया। यह क्षण उपस्थित लोगों के लिए गर्व का विषय था, क्योंकि पहली बार विदेशी मेहमानों ने स्थानीय नेतृत्व और संस्कृति के प्रति इतनी गहरी श्रद्धा दिखाई।
स्थानीय लोगों में खुशी की लहर
थाईलैंड से आए पर्यटकों का स्वागत और उनका सकारात्मक अनुभव सुनकर स्थानीय लोगों में भी खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह एक ऐतिहासिक क्षण है। विदेशी पर्यटकों का आगमन न केवल इस स्थल की सुंदरता और महत्ता को उजागर करता है, बल्कि आने वाले समय में यहां के पर्यटन विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि मां तुतला भवानी धाम प्राचीन काल से ही आस्था का केंद्र रहा है। यहां हर वर्ष दूर-दराज़ से हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने आते हैं। अब जब विदेशी मेहमान भी इस स्थल की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तो निश्चित रूप से यह जगह अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक खास पहचान बनाएगी।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की ओर कदम
बिहार सरकार और पर्यटन विभाग द्वारा भी मां तुतला भवानी स्थल को विकसित करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। ईको-पर्यटन की दृष्टि से यहां की भौगोलिक संरचना, गुफाएं, झरने और घनी हरियाली बेहद महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां बेहतर आधारभूत संरचना और सुविधाओं का विस्तार किया जाए, तो यह स्थल आने वाले वर्षों में बौद्ध, जैन और हिंदू धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ वैश्विक नेचर टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
“धरती का स्वर्ग” – पर्यटकों की राय
थाईलैंड के पर्यटकों ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमने दुनिया के कई देशों में नेचर टूरिज्म देखा है। यूरोप, अमेरिका और एशियाई देशों में हमने कई नेशनल पार्क और प्राकृतिक स्थल घूमे हैं, लेकिन यहां जैसी पवित्रता, शांति और अध्यात्म से जुड़ा वातावरण कहीं महसूस नहीं हुआ। यह जगह वास्तव में धरती का स्वर्ग है।”
उनकी इस प्रतिक्रिया ने स्थानीय लोगों का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञ मानते हैं कि मां तुतला भवानी धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अमूल्य धरोहर है। यदि यहां विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाती हैं, तो यह स्थल न केवल रोहतास जिले बल्कि पूरे बिहार और भारत के पर्यटन उद्योग को नई दिशा देगा।
ग्रामीण भी अब इस बदलाव को लेकर उत्साहित हैं। उनका मानना है कि विदेशी पर्यटकों के आगमन से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। यहां हैंडीक्राफ्ट, लोककला, फोक डांस और पारंपरिक खानपान को भी बढ़ावा मिलेगा।
